जयशंकर के कूटनीतिक ब्रह्मास्त्र से टूटेगा P-5 देशों का घमंड, संयुक्त राष्ट्र में बड़ा बदलाव तय!

जयशंकर के कूटनीतिक ब्रह्मास्त्र से टूटेगा P-5 देशों का घमंड, संयुक्त राष्ट्र में बड़ा बदलाव तय!

आखिर क्या होने वाला है 26 September को New York के United Nations headquarters में? क्यों भारत के विदेश मंत्री जयशंकर अपनी एक बेहद खास टीम लेकर न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं? आखिर भारत UNSC में अपने वीटो और स्थायी सीट के लिए ऐसा क्या करने वाला है कि Washington से लेकर Beijing तक दुनिया के सबसे ताकतवर रणनीतिकारों के माथे पर पसीना आ गया है? संयुक्त राष्ट्र में बार-बार भारत के सामने आने वाले चीन के वीटो का घमंड अब हमेशा के लिए टूटने वाला है? ऐसा क्या इंतजाम कर चुका है भारत कि 8 दशकों से चली आ रही P-5 देशों की दादागिरी का अंत अब तय हो चुका है? संयुक्त राष्ट्र के रोस्ट्रम से एक ऐसा कूटनीतिक ब्रह्मास्त्र छूटने वाला है, जिसने America और Russia समेत दुनिया के एक दर्जन ताकतवर देशों को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया है।

दोस्तो, यह कोई साधारण कूटनीति नहीं है। यह विश्व व्यवस्था की धुरी को पश्चिम से खींचकर पूर्व की ओर मोड़ने का वह महासंग्राम है, जिसकी पटकथा खुद India के विदेश मंत्री Dr S Jaishankar ने लिखी है। September 2026 का यह महीना वैश्विक कूटनीति के पन्नों में एक ऐसे ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज होने जा रहा है, जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। 22 से 29 September तक चलने वाले UNGA के 81st सत्र का हाई लेवल वीक इस बार केवल कूटनीतिक भाषणों का मंच नहीं रह गया है। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी उस पुरानी और सड़ी-गली व्यवस्था के खिलाफ एक खुली बगावत बन चुका है। Dr S Jaishankar के नेतृत्व में Indian delegation New York पहुंच चुका है और इस बार भारत कोई भीख मांगने नहीं, बल्कि अपना हक छीनने गया है।

बंद दरवाजों के पीछे की कूटनीति में एक बहुत बड़ा और खतरनाक खेल खेला जा रहा था। Donald Trump के नेतृत्व वाले US administration और British कूटनीतिज्ञों ने India को एक बहुत बड़ा झांसा देने की कोशिश की थी। उन्होंने UNSC में India को एक बिना वीटो वाली second class seat का लॉलीपॉप थमाने का जाल बिछाया था। Trump administration की सोच यह थी कि India को UNSC में लाकर China को संतुलित किया जाए, लेकिन America के वीटो एकाधिकार को कोई चुनौती न मिले। पश्चिम के ये देश India को अंदर तो लाना चाहते थे, लेकिन अपने बराबर खड़ा नहीं करना चाहते थे। लेकिन Indian delegation ने इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर no compromise बोलकर चकनाचूर कर दिया है। India ने Washington और London को दो टूक अल्टीमेटम दे दिया है कि या तो समान वीटो पावर दो, या फिर हमारी अपनी अलग दुनिया के लिए तैयार रहो।

इस पूरे महासंग्राम को समझने के लिए आपको United Nations के जन्म और उसके वर्तमान खोखलेपन को समझना होगा। 1945 में जब United Nations की स्थापना हुई थी, तब दुनिया में केवल 51 स्वतंत्र देश थे। Asia और Africa का एक बहुत बड़ा हिस्सा उस समय British और French साम्राज्यवाद की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। उस समय की पांच विजेता शक्तियों ने खुद को UNSC का स्थायी सदस्य घोषित कर लिया और वीटो पावर का ताज पहन लिया। वीटो पावर का सीधा सा अर्थ यह है कि अगर 14 सदस्य किसी प्रस्ताव पर सहमत हों, लेकिन P-5 में से कोई एक देश ना कह दे, तो वह प्रस्ताव वहीं मृत हो जाता है।

आज परिस्थितियां पूरी तरह से बदल चुकी हैं। आज United Nations में 193 देश हैं। लेकिन UNSC में आज भी वही 5 स्थायी सदस्य हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा कूटनीतिक पाखंड है कि जिस Africa महाद्वीप में UN के 54 सदस्य देश हैं और जहां United Nations के सबसे अधिक शांति मिशन चल रहे हैं, उसका सुरक्षा परिषद में एक भी स्थायी प्रतिनिधि नहीं है। India का UNSC की स्थायी सीट पर दावा कोई खैरात नहीं है, बल्कि यह ठोस और अकाट्य तथ्यों पर टिका है। India आज 1.4 billion आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा देश है। Purchasing Power Parity यानी PPP के आधार पर India दुनिया की 3rd और नॉमिनल GDP के आधार पर 5th सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। India ने अब तक UN peace keeping missions में अपने 2.7 lakh से अधिक सैनिकों का योगदान दिया है, जो किसी भी P-5 देश से कई गुना अधिक है। इस दौरान India ने अपने 170 से अधिक वीर सैनिकों की शहादत दी है। India अब तक 8 बार UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है, जिसमें नवीनतम कार्यकाल 2021 से 2022 का रहा है।

लेकिन India के इस हक के रास्ते में सबसे बड़ी और एकमात्र वास्तविक दीवार China है। कूटनीतिक गलियारों में यह एक खुला रहस्य है कि US, Russia, France और UK सार्वजनिक रूप से India की स्थायी सदस्यता का समर्थन कर चुके हैं। लेकिन China एक बहुत ही शातिर और दोहरा खेल खेलता रहा है। China सामने से कहता है कि वह UN में India की बड़ी भूमिका का समर्थन करता है, लेकिन पर्दे के पीछे वह वीटो की तलवार लेकर खड़ा रहता है। China खुद सीधे तौर पर India का विरोध करने से बचता है क्योंकि वह Global South का फर्जी मसीहा बनना चाहता है। इसलिए China ने कई सालों से एक खुफिया प्रॉक्सी वॉर छेड़ रखा है। China ने पर्दे के पीछे से Uniting for Consensus यानी UFC समूह को खड़ा किया है, जिसे कूटनीतिक भाषा में Coffee Club कहा जाता है। इस Coffee Club का एकमात्र उद्देश्य G-4 देशों यानी India, Japan, Germany और Brazil की स्थायी सदस्यता को किसी भी कीमत पर रोकना है।

इस Coffee Club की संरचना बेहद दिलचस्प है। India को रोकने के लिए China ने Pakistan को आगे कर रखा है। Japan को रोकने के लिए South Korea, Brazil को रोकने के लिए Argentina और Germany को रोकने के लिए Italy को मोहरा बनाया गया है। जब भी सुधार की बात इंटर गवर्नमेंटल नेगोशिएशंस यानी IGN में उठती है, China इन देशों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है।

लेकिन अब Dr S Jaishankar ने इस ड्रैगन का एक permanent इलाज खोज लिया है। India ने China को उसी के बुने हुए जाल में फंसाने की एक अचूक रणनीति अपनाई है। India ने African Union के 54 देशों के साथ एक अभूतपूर्व रणनीतिक गठबंधन कर लिया है। African Union काफी समय से Ezulwini Consensus और Sirte Declaration के तहत अपने महाद्वीप के लिए दो स्थायी वीटो युक्त सीटों और पांच अस्थायी सीटों की मांग कर रहा है। India ने स्पष्ट कर दिया है कि वह African Union की इन मांगों का पूर्ण समर्थन करता है। नतीजा यह हुआ है कि G-4 और African Union के 54 देश अब एक मंच पर आ गए हैं। इसके साथ ही India छोटे द्वीपीय विकासशील देशों यानी SIDS और Caribbean देशों को भी अपने पाले में ला चुका है। India अब 26 September को UNGA के रोस्ट्रम से एक joint resolution मेज पर पटकने जा रहा है। इस ड्राफ्ट रेजोल्यूशन में India और Africa दोनों की स्थायी सदस्यता का संयुक्त प्रस्ताव होगा। इस प्रस्ताव को France, Russia और UK का मौन या खुला समर्थन पहले ही हासिल हो चुका है, और Trump administration भी अब बैकफुट पर आ गया है।

जब यह प्रस्ताव मेज पर आएगा, तो China के सामने एक भयानक कूटनीतिक संकट खड़ा हो जाएगा। China के पास सिर्फ दो ही विकल्प होंगे। या तो वह अपने वीटो का इस्तेमाल करे, या चुपचाप इस रेजोल्यूशन को पास होने दे। अगर China ने इस संयुक्त प्रस्ताव पर वीटो किया, तो वह एक ही झटके में India ही नहीं, बल्कि पूरे Africa महाद्वीप के 54 देशों का घोषित दुश्मन बन जाएगा। China का Global South के नेता होने का मुखौटा हमेशा के लिए उतर जाएगा। Africa में China का अरबों डॉलर का Belt and Road Initiative यानी BRI साम्राज्य रातों-रात राख हो जाएगा। China के इसी डर को हथियार बनाकर India ने उसे कूटनीतिक रूप से लकवाग्रस्त करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है।

अगर आपको लग रहा है कि India सिर्फ UNGA में ही खेल कर रहा है, तो आप गलत हैं। पर्दे के पीछे एक और बहुत बड़ा चक्रव्यूह रचा जा रहा है जिसने पश्चिमी देशों से लेकर ड्रैगन तक की नींद उड़ा दी है। इसे P4M Initiative यानी Partners for Multilateralism कहा जा रहा है। Davos में World Economic Forum के दौरान गुपचुप तरीके से इस समूह की नींव रखी गई थी। इसमें European Union, Brazil, Kenya और Canada के शीर्ष नेता शामिल थे। इस P4M समूह का जन्म इस गहरी हताशा से हुआ है कि वर्तमान United Nations पूरी तरह से विफल हो चुका है। चाहे Russia Ukraine युद्ध हो, Middle East का तनाव हो, या Red Sea में हूती विद्रोहियों का आतंक, UN सिर्फ एक मूकदर्शक बनकर रह गया है। इस हताशा के बीच P4M में India की अचानक और धमाकेदार एंट्री कोई संयोग नहीं है।

India जानता है कि जब तक UNGA के 193 सदस्यों में से 2 तिहाई बहुमत का भारी दबाव P-5 देशों पर नहीं पड़ेगा, तब तक सुरक्षा परिषद के दरवाजे नहीं खुलेंगे। India पहले से ही Non Aligned Movement, BRICS, G-20 और G-4 का प्रमुख स्तंभ है। अब P4M में शामिल होकर India ने पश्चिमी देशों और Global South के बीच एक बहुत मजबूत पुल बना दिया है। India की खुफिया रणनीति यह है कि वह Artificial Intelligence यानी AI, Climate Change और Digital Public Infrastructure यानी DPI जैसे 21st century के हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। India इन तकनीकों के माध्यम से उन देशों को अपने पाले में कर रहा है, जो कभी China के कर्ज जाल में फंसे हुए थे। India उन्हें China के BRI का एक पारदर्शी और सुरक्षित विकल्प दे रहा है। जब India सुरक्षा परिषद सुधार का प्रस्ताव लाएगा, तो P4M के ये देश India के समर्थन में एक अभेद्य दीवार बनकर खड़े होंगे।

आज दुनिया की भू-राजनीतिक वास्तविकता यह है कि India के बिना कोई भी वैश्विक निर्णय लागू नहीं किया जा सकता। कोरोना काल में जब ताकतवर देश दवाओं की जमाखोरी कर रहे थे, तब India ने Vaccine Maitri के तहत दुनिया के 100 से अधिक देशों को संजीवनी पहुंचाई थी। Turkey और Syria में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान Operation Dost के जरिए India ने सबसे पहले राहत भेजी थी। Yemen, Sudan और Ukraine जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्रों से India ने केवल अपने नागरिकों को ही नहीं, बल्कि दर्जनों अन्य देशों के लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। India ने यह साबित कर दिया है कि वास्तविक वैश्विक नेतृत्व केवल किसी कागज पर लिखे वीटो पावर से नहीं आता। वास्तविक नेतृत्व क्षमता, नीयत और वसुधैव कुटुम्बकम की नीति से आता है। आज दुनिया को India की जरूरत United Nations से कहीं ज्यादा है। अगर UN आज सुधार नहीं करता है, तो वह League of Nations की तरह इतिहास के कूड़ेदान में चला जाएगा।

UNGA का यह 81st सत्र वर्तमान विश्व व्यवस्था के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम कर रहा है। Dr S Jaishankar की दर्जनों द्विपक्षीय बैठकें कोई साधारण शिष्टाचार भेंट नहीं हैं। ये समर्थन के उन तारों को जोड़ने का काम कर रही हैं, जो आने वाले समय में UNSC के भारी-भरकम लोहे के दरवाजों को पिघला देंगे। P4M में India की धाकड़ एंट्री, G-4 का African Union के साथ ऐतिहासिक गठबंधन, Trump administration के second class seat के झांसे को लात मारना और China को उसके ही Coffee Club के जाल में फंसाना, यह सब इस बात का चीख-चीख कर ऐलान कर रहा है कि India अब केवल मेज पर एक कुर्सी नहीं मांग रहा है। India अब खुद उस मेज के नियमों को फिर से लिख रहा है। विश्व के एक दर्जन से अधिक प्रमुख देश आज India के समर्थन में खड़े हैं क्योंकि वे जानते हैं कि एक मजबूत और वीटो संपन्न India ही भविष्य की मल्टीपोलर दुनिया में शांति की एकमात्र गारंटी है।

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