होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान को खुला चकमा, समंदर के ‘अंधेरे’ में कैसे हो रहा है अरबों का खेल?

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका और ईरान को खुला चकमा, समंदर के 'अंधेरे' में कैसे हो रहा है अरबों का खेल?

समंदर की लहरों के नीचे और रडार की नजरों से बहुत दूर आज मिडिल ईस्ट में एक ऐसा खुफिया खेल चल रहा है जिसने दुनिया भर के कूटनीतिक और सैन्य विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। खाड़ी देशों के आसपास का इलाका इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है। लाल सागर से लेकर फारस की खाड़ी तक हर तरफ भयंकर टेंशन है। लेकिन इस भारी ड्रामे और मिलिट्री डिप्लॉयमेंट के बीच दुनिया के लिए सबसे जरूरी चीज यानी कच्चे तेल और गैस की सप्लाई आखिर कैसे हो रही है। आज हम आपको उस सीक्रेट ऑपरेशन के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे समंदर की दुनिया में डार्क ट्रांजिट कहा जाता है। ये एक ऐसा अंधेरा सफर है जहां विशालकाय ऑयल टैंकर रातों रात रडार से गायब हो जाते हैं और दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेनाओं के ठीक नाक के नीचे से अपना माल लेकर निकल जाते हैं। अमेरिका और ईरान की भारी भरकम नेवी बस देखती रह जाती है और अरब देशों का तेल उन देशों तक पहुंच जाता है जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

इस पूरी कूटनीतिक और रणनीतिक बाजीगरी का सेंटर पॉइंट है होर्मुज स्ट्रेट। ये वो संकरा समुद्री रास्ता है जिसे ग्लोबल इकॉनमी की शह रग कहा जाता है। पूरी दुनिया का लगभग बीस से पच्चीस प्रतिशत तेल इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। लेकिन आज के समय में ये इलाका दुनिया के सबसे खतरनाक और संवेदनशील समुद्री मार्गों में तब्दील हो चुका है। एक तरफ ईरानी सेना के स्पीडबोट्स और उनका आक्रामक पेट्रोलिंग ग्रिड है, तो दूसरी तरफ दुनिया का बॉस बनने की चाहत रखने वाली अमेरिकी नौसेना के भारी भरकम डिस्ट्रॉयर्स गश्त लगा रहे हैं। दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के इतने करीब ऑपरेट कर रही हैं कि किसी भी वक्त एक छोटी सी चिंगारी एक बड़े टकराव में बदल सकती है। इस भयंकर टेंशन के बीच अगर तेल के बड़े जहाज सामान्य तरीके से गुजरें, तो उन पर खतरा चौबीसों घंटे मंडराता रहता है। ऐसे में संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई और कतर ने जो रास्ता निकाला है, वो उनकी गहरी रणनीतिक सोच का सबसे बड़ा सबूत है।

यूएई की सरकारी तेल कंपनी एडनॉक ने एक बेहद चालाक और रिस्की स्ट्रेटेजी अपनाई है जिसे डार्क ट्रांजिट कहा जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये डार्क ट्रांजिट होता क्या है। समंदर में चलने वाले हर छोटे बड़े कमर्शियल जहाज में एक ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम यानी एआईएस लगा होता है। ये एक तरह का ट्रांसपोंडर होता है जो लगातार सैटेलाइट और रडार को जहाज की लोकेशन, स्पीड और उसके रूट की लाइव जानकारी भेजता रहता है। डार्क ट्रांजिट का सीधा मतलब है कि जैसे ही तेल से भरे ये विशालकाय टैंकर होर्मुज स्ट्रेट के इस खतरनाक इलाके में एंट्री करते हैं, वो अपने इन ट्रांसपोंडर्स को पूरी तरह से शट डाउन कर देते हैं। सिस्टम बंद होते ही ये जहाज डिजिटल मैप और दुनिया भर के रडार स्क्रीन से पूरी तरह से गायब हो जाते हैं। आसान भाषा में समझें तो जहाज समंदर के सीने पर एक भूत की तरह सफर करने लगते हैं जिन्हें रियल टाइम में ट्रैक करना या पकड़ना किसी के लिए भी लगभग नामुमकिन हो जाता है।

इस स्टेल्थ नेविगेशन या छिपकर चलने की तकनीक ने यूएई को एक बहुत बड़ा एज दे दिया है। जब दुनिया भर में जिओ पॉलिटिकल टेंशन चरम पर है और शिपिंग इंश्योरेंस के रेट आसमान छू रहे हैं, तब भी यूएई का एक्सपोर्ट धड़ल्ले से जारी है। एडनॉक का ये ऑपरेशन इसलिए भी सफल हो पा रहा है क्योंकि उन्होंने किसी थर्ड पार्टी या किराए के जहाजों पर निर्भर रहने के बजाय अपने खुद के फ्लीट यानी जहाजों के बेड़े पर भरोसा जताया है। किराए के जहाज चलाने वाली कंपनियां बहुत ज्यादा डरपोक होती हैं और वो किसी भी रिस्क वाले इलाके में जाने से साफ मना कर देती हैं। लेकिन एडनॉक ने इसका तोड़ निकाल लिया है। इस काम में नेविग एइट के जरिए ऑपरेट किए जाने वाले जहाज सबसे आगे हैं। इसके साथ ही चीन के वानहुआ केमिकल ग्रुप के साथ उनके जॉइंट वेंचर ने इस पूरे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को इतना मजबूत बना दिया है कि आज कोई भी ताकत उनके एक्सपोर्ट को रोक नहीं पा रही है।

एडनॉक के इस विशाल बेड़े में सिर्फ कच्चे तेल के बड़े करियर ही नहीं हैं बल्कि रिफाइंड प्रोडक्ट्स ले जाने वाले टैंकर और गैस कैरियर्स भी शामिल हैं। अपनी खुद की शिपिंग लाइन होने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कंपनी को ऑपरेशनल लेवल पर गजब की फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है। उन्हें किसी बाहरी कंपनी के नखरे नहीं उठाने पड़ते। इंडस्ट्री के बड़े बड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसी इंडिपेंडेंट सिस्टम की वजह से एडनॉक ने होर्मुज के इस पूरे भंवर जाल से अपने जहाजों को सुरक्षित निकालने का एक फुल प्रूफ सिस्टम तैयार कर लिया है। जहां दूसरे देश और कंपनियां सप्लाई चेन के टूटने का रोना रो रही हैं, वहीं यूएई ने खामोशी से अपना काम चालू रखा है।

सिर्फ यूएई ही नहीं, इस पूरे डार्क गेम में कतर भी किसी से पीछे नहीं है। कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस एक्सपोर्टर्स में से एक है। कतर ने भी बदलती हुई जिओ पॉलिटिकल परिस्थितियों के हिसाब से खुद को बहुत तेजी से ढाला है। कतर भी होर्मुज के रास्ते अपना एक्सपोर्ट पूरी ताकत से जारी रखे हुए है। जहाजों के लाइव ट्रैकिंग डेटा पर अगर नजर डालें तो हाल ही में कतर का एक बहुत बड़ा एलएनजी टैंकर अल रयान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के बाद ओमान की राजधानी मस्कट के उत्तर में अचानक रडार पर स्पॉट किया गया। ये जहाज सीधे चीन की तरफ जा रहा था। लेकिन मजे की बात ये है कि इस महीने की शुरुआत में जब ये जहाज कतर की रास लफान फैसिलिटी के पास था, तो इसने अचानक से अपने सारे सिग्नल भेजने बंद कर दिए थे। यानी कतर भी अब इसी डार्क ट्रांजिट और स्टेल्थ मोड का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहा है। आज के समय में ग्लोबल सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए जहाजों का इस तरह बीच बीच में रडार से गायब हो जाना एक न्यू नॉर्मल बन चुका है।

इन सब के अलावा एडनॉक ने एक और गजब की रणनीति अपनाई है जिसे शिपिंग की दुनिया में शटल रन कहा जाता है। शटल रन का मतलब है बहुत कम समय में माल की डिलीवरी करके फौरन वापस लौटना। जैसे ही जहाज सुरक्षित इलाके में पहुंचकर अपना माल उतारते हैं, वो बिना एक भी पल बर्बाद किए वापस अपने बेस की तरफ दौड़ पड़ते हैं ताकि दोबारा तेल या गैस भर सकें। इसके लिए यूएई अपने जिरकू द्वीप और रुवैस रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स जैसे टर्मिनलों का दिन रात इस्तेमाल कर रहा है। यहां से लोडिंग का काम इतनी फुर्ती से होता है कि जब तक किसी को कुछ समझ में आए जहाज समंदर में दूर निकल चुका होता है।

ये पूरी सिचुएशन हमें बताती है कि जब बात इकॉनमी और सर्वाइवल की आती है तो खाड़ी के देश किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वो किसी के दबाव में आने वाले नहीं हैं। अमेरिका और ईरान चाहे जितना भी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर लें, लेकिन ग्लोबल एनर्जी का ये फ्लो रुकने वाला नहीं है। भारत जैसे देशों के लिए भी ये एक बहुत बड़ी राहत की बात है क्योंकि एनर्जी सप्लाई के इसी निर्बाध फ्लो की वजह से दुनिया भर में तेल और गैस के दाम एक दायरे में टिके हुए हैं। अगर होर्मुज स्ट्रेट में ये डार्क ट्रांजिट और स्टेल्थ ऑपरेशन्स बंद हो जाएं तो पूरी दुनिया में हाहाकार मच जाएगा। कुल मिलाकर समंदर के इस अंधेरे सफर ने दुनिया की अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़े क्रैश से बचा कर रखा है और खाड़ी देशों ने ये साबित कर दिया है कि कूटनीति सिर्फ बंद कमरों में नहीं बल्कि समंदर की लहरों पर भी उतनी ही आक्रामकता के साथ खेली जाती है।

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