चीन-तुर्की के आंगन में भारत की ब्रह्मोस और पिनाका का खौफ, जिनपिंग और एर्दोगन की उड़ी नींद

चीन-तुर्की के आंगन में भारत की ब्रह्मोस और पिनाका का खौफ, जिनपिंग और एर्दोगन की उड़ी नींद

बीजिंग से लेकर अंकारा तक आज अगर किसी एक देश के नाम से खौफ का माहौल है, तो वो नाम है भारत। एक वक्त था जब पाकिस्तान, चीन और तुर्की मिलकर भारत के खिलाफ साजिशों के जाल बुनते थे। लेकिन आज हालात पूरी तरह से पलट चुके हैं। जिनपिंग की लाल सेना हो या तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का अहंकार, दोनों को भारत की एक ऐसी खामोश लेकिन बेहद आक्रामक कूटनीति ने चारों खाने चित कर दिया है। पाकिस्तान, चीन और खुद को इस्लामिक दुनिया का खलीफा समझने वाला तुर्की, ये तीनों देश एक साथ भारत के बिछाए जाल में ऐसे उलझ गए हैं कि इन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा।

दुनिया के सामने खुद को मिसाइलों का बेताज बादशाह बताने वाला चीन आज एक स्वदेशी भारतीय मिसाइल के नाम से कांप रहा है। नौबत यहां तक आ गई है कि बीजिंग में आपातकालीन बैठकें बुलाई जा रही हैं। वहीं दूसरी तरफ, कश्मीर के मुद्दे पर हमेशा पाकिस्तान की तरफदारी करने वाले तुर्की की मीडिया में आज चीख-पुकार मची हुई है। इसकी वजह सीधी है, भारत ने आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस को हथियार देकर तुर्की के आंगन में ही उसकी मजबूत घेराबंदी कर दी है। वियतनाम और इंडोनेशिया में भी भारत की जबरदस्त एंट्री ने ड्रैगन की नींद उड़ा कर रख दी है। आज हम आपको भारत के उस मास्टरस्ट्रोक की पूरी इनसाइड स्टोरी बताएंगे जिसने चीन के डिफेंस एक्सपोर्ट को तबाह कर दिया है और तुर्की को घुटनों पर ला दिया है।

चीन का सबसे बड़ा खौफ बनी भारत की ब्रह्मोस मिसाइल

चीन हमेशा से अपनी हथियारों की ताकत का दिखावा करता रहा है, लेकिन अब भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने उसकी सारी हेकड़ी निकाल दी है। चीन के रक्षा विशेषज्ञों और बड़े चीनी थिंक टैंक ने इतिहास में पहली बार किसी विदेशी मिसाइल को सीधे तौर पर इंटरनेशनल सिक्योरिटी का ट्रबलमेकर घोषित कर दिया है। ये कोई मामूली बात नहीं है। ये उस देश की बौखलाहट है जो पूरी दुनिया पर अपनी मिलिट्री पावर की धौंस जमाता है। ब्रह्मोस कोई साधारण क्रूज मिसाइल नहीं है, बल्कि ये एक ऐसा अचूक और साइलेंट किलर हथियार है जिसकी काट आज तक दुनिया की बड़ी से बड़ी मिलिट्री पावर नहीं निकाल पाई हैं।

आखिर चीनी एक्सपर्ट्स ब्रह्मोस से इतना क्यों डरे हुए हैं? इसकी सबसे बड़ी वजह है इसकी बेतहाशा स्पीड और मारक सटीकता। इसे बिल्कुल आसान भाषा में समझिए। ब्रह्मोस की स्पीड 2.8 मैक है। यानी आवाज की गति से लगभग तीन गुना ज्यादा तेज। जब तक दुश्मन का रडार इसे डिटेक्ट करता है, जब तक दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिवेट होता है, तब तक ये मिसाइल अपना काम तमाम कर चुकी होती है। इसमें फायर एंड फॉरगेट यानी एक बार दागो और भूल जाओ वाली अचूक टेक्नोलॉजी लगी है जो इसे और भी खतरनाक बनाती है। चीन को ये बात बहुत अच्छे से पता है कि अगर ये मिसाइल उसकी नौसेना के भारी-भरकम युद्धपोतों की तरफ मुड़ गई, तो समंदर में उन्हें छिपने का कोई मौका नहीं मिलेगा। चीनी नेवी के पास इस रफ्तार को रोकने का कोई भी सॉलिड और प्रमाणित डिफेंस सिस्टम आज की तारीख में मौजूद नहीं है।

साउथ चाइना सी में ड्रैगन की नाइन-डैश लाइन पर भारत का हंटर

ये घबराहट सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। भारत अब सिर्फ हथियार इम्पोर्ट करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि हथियारों के जरिए ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल समीकरण बदलने वाला एक अग्रेसिव पावर बन चुका है। साउथ चाइना सी में चीन की विस्तारवादी नीतियों और उसकी दबंगई को हमेशा के लिए दफन करने के लिए भारत ने उन देशों को हथियारबंद करना शुरू कर दिया है, जिनका चीन के साथ सीधा बॉर्डर और समुद्री विवाद चल रहा है।

फिलीपींस को ब्रह्मोस की डिलीवरी ने समंदर में शक्ति संतुलन को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है। अप्रैल 2024 में पहली खेप पहुंचने के बाद 2025 और अब 2026 तक हथियारों का जो जखीरा वहां पहुंचा है, उसने फिलीपींस को एक नई और आक्रामक ताकत दी है। फिलीपींस के पास ब्रह्मोस पहुंचने के बाद साउथ चाइना सी में चीन का पूरा गेमप्लान फेल हो गया है। चीनी नेवी जो कल तक फिलीपींस की छोटी नावों को डराती थी, आज उसी इलाके में गश्त करने से पहले दस बार सोच रही है।

सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग में जब भारत के रक्षा सचिव की तरफ से आधिकारिक तौर पर वियतनाम के साथ ब्रह्मोस डील की पुष्टि की गई, तो चीनी खेमे में सन्नाटा छा गया। वियतनाम को ब्रह्मोस देने के फैसले ने चीन की रातों की नींद पूरी तरह उड़ा दी है। वियतनाम की लोकेशन ऐसी है कि वहां ब्रह्मोस की तैनाती का सीधा मतलब है चीन के सबसे अहम नेवल बेस का सीधे निशाने पर आ जाना। इसके साथ ही, इंडोनेशिया के साथ भी लगभग 450 मिलियन डॉलर का ब्रह्मोस एग्रीमेंट बिल्कुल फाइनल स्टेज में है।

आखिर इंडोनेशिया के साथ होने वाली ये डील चीन के लिए इतना बड़ा सिरदर्द क्यों है? क्योंकि इंडोनेशिया के समुद्री रास्ते ग्लोबल ट्रेड की जीवन रेखा हैं। वहां ब्रह्मोस की मौजूदगी का सीधा मतलब है चीन की सप्लाई चेन पर भारत का अप्रत्यक्ष कंट्रोल स्थापित होना।

अब जरा गहराई से समझिए कि चीन का सबसे बड़ा डर क्या है और उसकी कुख्यात नाइन-डैश लाइन का इससे क्या कनेक्शन है। नाइन-डैश लाइन दक्षिण चीन सागर में चीन द्वारा खींची गई एक यू आकार की पूरी तरह से विवादित और इमेजिनरी लाइन है। चीन बिना किसी लॉजिक के दावा करता है कि इस रेखा के अंदर आने वाला 90 प्रतिशत समुद्री इलाका सिर्फ उसका है। ये दावा इतना बेतुका है कि इसके दायरे में फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ब्रुनेई जैसे देशों के अपने लीगल समुद्री अधिकार क्षेत्र भी आ जाते हैं। 1947 में पहली बार एक नक्शे में दिखाई गई इस लाइन को आज चीन अपनी दादागिरी का मेन वेपन मानता है।

लेकिन जब फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया के कोस्टलाइन पर ब्रह्मोस पूरी तरह एक्टिव मोड में तैनात होगी, तो चीन का ये नाइन-डैश लाइन का दावा सिर्फ एक रद्दी का टुकड़ा बनकर रह जाएगा। ब्रह्मोस की मारक क्षमता चीन को इस इलाके में अपनी मनमानी करने से हर हाल में रोकेगी। 2021 में जब भारत ने एलएसी पर ब्रह्मोस तैनात की थी, तब भी चीन का यही डर दुनिया के सामने आया था और आज क्वाड और आसियान देशों के साथ भारत की बढ़ती पार्टनरशिप चीन को इसी वजह से खटक रही है।

तुर्की के आंगन में भारत का अचूक पलटवार

चीन का गुरूर तोड़ने के बाद, अब रुख करते हैं तुर्की की तरफ। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन लंबे समय से इंटरनेशनल फोरम पर पाकिस्तान का अंधा सपोर्ट करते हुए कश्मीर के मुद्दे पर बेवजह अपना एजेंडा चलाते रहे हैं। लेकिन आज हालात ये हैं कि तुर्की के मीडिया और डिफेंस एक्सपर्ट्स के बीच भारी हड़कंप मचा हुआ है। तुर्की मीडिया आज भारत पर तुर्की के दुश्मनों को खतरनाक हथियार देने का खुला आरोप लगा रहा है। भारत ने आर्मेनिया को मिलिट्री लेवल पर इतना मजबूत कर दिया है कि तुर्की और अजरबैजान का पूरा अलायंस बैकफुट पर आ गया है।

आखिर नागोर्नो-कराबाख युद्ध के बाद भारत आर्मेनिया का सबसे बड़ा वेपन सप्लायर कैसे बन गया? जब इस युद्ध में अजरबैजान को तुर्की और पाकिस्तान का पूरा मिलिट्री और टेक्निकल सपोर्ट मिल रहा था, तब भारत ने आर्मेनिया का हाथ थामा। आज दोनों देशों के बीच लगभग 2 बिलियन डॉलर के भारी-भरकम डिफेंस एग्रीमेंट हो चुके हैं। भारत का स्वदेशी पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, एटीएजीएस आर्टिलरी गन और स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार आज तुर्की के लिए सबसे बड़ी दहशत बन चुके हैं।

पिनाका रॉकेट सिस्टम की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि ये मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट फायर करके दुश्मन के बंकरों और ठिकानों को पल भर में तबाह कर सकता है। वहीं स्वाति रडार दुश्मन की तोपों की एग्जैक्ट लोकेशन पलक झपकते ही बता देता है। आर्मेनिया अब रूस पर अपनी पुरानी डिपेंडेंसी खत्म कर चुका है और भारत के इन एडवांस हथियारों से अजरबैजान और तुर्की का घमंड हमेशा के लिए तोड़ने की पूरी तैयारी कर चुका है।

ग्रीस और साइप्रस के साथ मिलकर तुर्की की घेराबंदी

तुर्की का दर्द सिर्फ आर्मेनिया तक ही लिमिटेड नहीं है। ग्रीस के साथ भारत का तेजी से बढ़ता डिफेंस कोऑपरेशन तुर्की को पूरी तरह से जकड़ रहा है। भूमध्य सागर में ग्रीस और तुर्की एक दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन हैं। ऐसे में भारत और ग्रीस के बीच बढ़ते जॉइंट मिलिट्री एक्सरसाइज और डिफेंस डील्स से तुर्की के पसीने छूट रहे हैं। इतना ही नहीं, साइप्रस के सपोर्ट में भारत के खुलकर फ्रंट फुट पर आ जाने से तुर्की की बेचैनी दोगुनी हो गई है। तुर्की ने उत्तरी साइप्रस पर अवैध कब्जा कर रखा है, और भारत अब ग्लोबल लेवल पर साइप्रस की संप्रभुता का पुरजोर समर्थन कर रहा है।

भारत की इस स्ट्रेटजी से एक बात बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर हो गई है। पाकिस्तान का साथ देने की कीमत अब तुर्की को डिप्लोमैटिक और मिलिट्री मोर्चे पर बहुत भारी चुकानी पड़ रही है। भारत की इस प्रो-एक्टिव डिफेंस डिप्लोमेसी ने साबित कर दिया है कि अब भारत चुपचाप बैठकर वार सहने वाला देश नहीं रहा। अब भारत सीधा दुश्मन के घर में घुसकर उसके सबसे बड़े विरोधियों को ताकतवर बनाता है।

ग्लोबल डिफेंस मार्केट का नया किंग बन रहा भारत

आज ब्रह्मोस, पिनाका और आकाश जैसे हथियार सिर्फ भारत की सुरक्षा का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये भारत की आक्रामक और पावरफुल फॉरेन पॉलिसी के सबसे बड़े प्रतीक बन चुके हैं। चीन को फिलीपींस और वियतनाम के जरिए साउथ चाइना सी में काउंटर करना, और तुर्की को आर्मेनिया और ग्रीस के जरिए यूरोप और एशिया के बॉर्डर पर उलझा कर रखना, भारत की इसी न्यू-एज डिप्लोमेसी का सबसे अहम हिस्सा है।

भारत की इस अग्रेसिव रक्षा कूटनीति से एशिया और यूरोप के पावर डायनामिक्स में जबरदस्त बदलाव आ रहे हैं। ब्रह्मोस और पिनाका के एक्सपोर्ट के जरिए भारत अब ग्लोबल वेपन मार्केट में एक नई महाशक्ति बनकर उभर रहा है। चीन की बौखलाहट और तुर्की का डर इस बात का सबसे बड़ा और पुख्ता सबूत है कि भारत का तीर बिल्कुल सही निशाने पर लगा है और अब भारत को ग्लोबल पावर बनने से दुनिया की कोई भी ताकत रोक नहीं सकती।

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