अंबानी बनाम अडानी: अमेरिकी कंपनी ने अडानी ग्रुप में झोंके 19000 करोड़, रिलायंस को लगा तगड़ा झटका!

अंबानी बनाम अडानी: अमेरिकी कंपनी ने अडानी ग्रुप में झोंके 19000 करोड़, रिलायंस को लगा तगड़ा झटका!

ग्लोबल मार्केट में भारत के दो दिग्गजों की महाजंग

दुनिया भर के शेयर बाजार और बड़े-बड़े इन्वेस्टर्स इस वक्त सिर्फ एक ही बाजार की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं, और वो है भारत। लेकिन भारतीय बाजार के अंदर इन दिनों एक ऐसा खेल चल रहा है जिसने पूरी दुनिया के फाइनैंशियल एनालिस्ट्स को हैरान कर दिया है। यह कहानी सिर्फ दो कंपनियों की नहीं है, बल्कि यह कहानी है भारत के दो सबसे बड़े और ताकतवर बिजनेस टायकून्स की। एक तरफ हैं रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, जिनका कारोबार दशकों से भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ माना जाता रहा है, और दूसरी तरफ हैं अडानी ग्रुप के चीफ गौतम अडानी, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर में ऐसा तूफान खड़ा किया है जिसकी गूंज सीधे अमेरिका के वॉल स्ट्रीट तक सुनाई दे रही है। ग्लोबल मार्केट से आने वाला मोटा पैसा अब अपना रुख बदल रहा है। जो विदेशी निवेशक कल तक रिलायंस पर आंख मूंदकर दांव लगाते थे, आज वो अपना पैसा वहां से निकालकर अडानी ग्रुप की तिजोरियों में भर रहे हैं। यह कोई मामूली शिफ्ट नहीं है, बल्कि यह भारतीय कॉरपोरेट इतिहास का एक नया अध्याय है, जहां पावर और पैसे का नया केंद्र पूरी तरह से शिफ्ट होता हुआ दिखाई दे रहा है।

गौतम अडानी का पलटवार और सबसे बड़े रईस का ताज

लगातार हो रहे हमलों और विदेशी साजिशों के बावजूद गौतम अडानी ने जो वापसी की है, वो किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं है। हाल ही के आंकड़ों ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है क्योंकि गौतम अडानी अब मुकेश अंबानी को पछाड़कर आधिकारिक तौर पर भारत और पूरे एशिया के सबसे बड़े रईस बन चुके हैं। कुछ समय पहले तक विदेशी रिपोर्ट्स और शॉर्ट-सेलर्स ने अडानी ग्रुप की साख को बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की थी। अमेरिका में भी अडानी ग्रुप के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया गया और एक मामला दायर किया गया। लेकिन सत्य को ज्यादा देर तक छुपाया नहीं जा सकता। अमेरिका में अडानी के खिलाफ दायर वो पूरा का पूरा मामला अब हमेशा के लिए बंद हो चुका है। इस केस के बंद होते ही उन तमाम विदेशी आलोचकों के मुंह पर ताला लग गया है जो अडानी ग्रुप के खत्म होने की भविष्यवाणियां कर रहे थे। इस क्लीन चिट का असर इतना भयंकर हुआ है कि दुनिया भर के बड़े फंड मैनेजर्स और ग्लोबल इन्वेस्टर्स का नजरिया रातों-रात बदल गया है। अब उन्हें समझ आ गया है कि भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी की ग्रोथ स्टोरी में अगर कोई सबसे बड़ा प्लेयर है, तो वो सिर्फ और सिर्फ गौतम अडानी हैं।

कैपिटल ग्रुप का 19,000 करोड़ का मेगा इन्वेस्टमेंट

विदेशी निवेशकों के बदले हुए इस नजरिए का सबसे बड़ा और सबसे पुख्ता सबूत अमेरिका से ही निकलकर आया है। दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों में से एक, कैपिटल ग्रुप ने भारत में अपना खजाना खोल दिया है। अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हेडक्वार्टर वाली यह कंपनी पूरी दुनिया में 3.3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक के भारी-भरकम फंड को मैनेज करती है। इतनी बड़ी कंपनी जब अपना पैसा कहीं लगाती है, तो वो सिर्फ रिटर्न नहीं देखती, बल्कि वो उस कंपनी के भविष्य और देश की अर्थव्यवस्था पर दांव लगाती है। ब्लूमबर्ग जैसी प्रतिष्ठित ग्लोबल फाइनैंशियल एजेंसी की रिपोर्ट ने यह खुलासा किया है कि कैपिटल ग्रुप ने हाल ही में अडानी ग्रुप की तीन प्रमुख कंपनियों में एक साथ 2 अरब डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 19,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश झोंक दिया है। यह कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है, यह वो पैसा है जो सीधे तौर पर भारत के बुनियादी ढांचे को और मजबूत करेगा।

इस महा-निवेश की टाइमलाइन को समझना भी बेहद जरूरी है। कैपिटल ग्रुप ने इसी महीने 5 मई को अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकनॉमिक जोन में अपनी बड़ी एंट्री मारी। उन्होंने सीधे ओपन मार्केट से शेयर उठाते हुए कंपनी में करीब दो फीसदी हिस्सेदारी खरीद ली। इस एक डील की कीमत ही लगभग 74.86 अरब रुपये यानी करीब 7,486 करोड़ रुपये आंकी गई है। ओपन मार्केट से इतनी बड़ी खरीदारी इस बात का सीधा ऐलान है कि ग्लोबल मार्केट को अडानी पोर्ट्स के बिजनेस मॉडल पर कितना गहरा विश्वास है। लेकिन कैपिटल ग्रुप सिर्फ पोर्ट्स तक नहीं रुका। भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए इस अमेरिकी ग्रुप ने अडानी पावर और अडानी ग्रीन एनर्जी में भी बड़ा दांव खेला है। इन दोनों कंपनियों में भी कैपिटल ग्रुप ने 1.5 फीसदी से लेकर 2 फीसदी तक की मजबूत हिस्सेदारी खरीद ली है। यह कदम बताता है कि ग्रीन एनर्जी और पावर जनरेशन के सेक्टर में अडानी की जो आक्रामक रणनीति है, विदेशी इन्वेस्टर्स उसे हाथों-हाथ ले रहे हैं।

रिलायंस इंडस्ट्रीज से विदेशी निवेशकों का मोहभंग?

जहां एक तरफ अडानी ग्रुप पर डॉलर बरस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए कैपिटल ग्रुप का रुख काफी सख्त और चिंताजनक नजर आ रहा है। एक समय था जब रिलायंस विदेशी निवेशकों की पहली पसंद हुआ करता था, लेकिन अब समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कैपिटल ग्रुप ने रिलायंस इंडस्ट्रीज में अपनी होल्डिंग्स को लगातार और बहुत तेजी से कम किया है। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा दिखाई देता है। अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें, तो स्थिति बिल्कुल साफ हो जाती है। मार्च 2017 में कैपिटल ग्रुप के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के करीब 755 मिलियन शेयर हुआ करते थे। यह एक बहुत बड़ा नंबर था। इसके बाद आज से छह साल पहले यह आंकड़ा घटकर 500 मिलियन पर आ गया। लेकिन सबसे बड़ा झटका हाल के आंकड़ों में देखने को मिला है। इस साल मार्च के अंत तक कैपिटल ग्रुप के पास रिलायंस के मात्र 142 मिलियन शेयर ही बचे हैं। 755 मिलियन से 142 मिलियन तक का यह सफर साफ तौर पर बता रहा है कि दुनिया का सबसे बड़ा फंड रिलायंस से अपना पैसा निकालकर उसे नई और ज्यादा ग्रोथ देने वाली जगहों पर शिफ्ट कर रहा है, और वो नई जगह अडानी ग्रुप है।

शेयर बाजार के आंकड़े और निवेशकों की चांदी

शेयर बाजार हमेशा सच बोलता है। बाजार के आंकड़े किसी भी कंपनी की असली हैसियत और इन्वेस्टर्स के भरोसे का सबसे सटीक पैमाना होते हैं। अगर हम पिछले एक साल के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें, तो अडानी और रिलायंस के बीच का यह फासला और भी ज्यादा साफ नजर आता है। पिछले एक ही साल के भीतर अडानी पावर के शेयरों ने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। अडानी पावर के शेयर में 94 फीसदी की जबरदस्त और तूफानी तेजी आई है। यानी जिन लोगों ने इस कंपनी में पैसा लगाया था, उनका पैसा लगभग दोगुना हो चुका है। अडानी पावर का शेयर फिलहाल मामूली तेजी के साथ 220.80 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है।

इसी तरह, भविष्य की ऊर्जा यानी रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी अडानी ग्रीन में भी पिछले एक साल में 35 फीसदी का शानदार उछाल दर्ज किया गया है। अडानी ग्रीन का शेयर लगातार अपनी मजबूती बनाए हुए है और फिलहाल 1.22 फीसदी की तेजी के साथ 1375.70 रुपये के मजबूत स्तर पर खड़ा है। वहीं, अगर हम भारत के समुद्री व्यापार को कंट्रोल करने वाली कंपनी अडानी पोर्ट्स की बात करें, तो इसके शेयरों में भी पिछले एक साल में 25 फीसदी की भारी तेजी दर्ज की गई है। अडानी पोर्ट्स का शेयर अभी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर 1786.80 रुपये पर ट्रेड कर रहा है और इसका 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,823.75 रुपये तक जा चुका है।

लेकिन इसके उलट, रिलायंस इंडस्ट्रीज के निवेशकों को पिछले एक साल में मायूसी का सामना करना पड़ा है। रिलायंस के शेयरों में तेजी आने के बजाय पिछले एक साल में 8.36 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट इस बात का संकेत है कि रिलायंस के ट्रेडिशनल बिजनेस मॉडल के मुकाबले अब बाजार उन कंपनियों को ज्यादा तरजीह दे रहा है जो इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्यूचर एनर्जी में तेजी से एक्सपैंड कर रही हैं।

अर्थव्यवस्था के लिए इसके मायने

यह पूरी हलचल सिर्फ दो कॉरपोरेट घरानों की जीत या हार तक सीमित नहीं है। यह भारत की बदलती हुई आर्थिक तस्वीर का सबसे बड़ा सबूत है। एक अमेरिकी कंपनी का भारत में आकर 19,000 करोड़ रुपये का निवेश करना यह साबित करता है कि भारत की ग्रोथ स्टोरी पर दुनिया की मुहर लग चुकी है। गौतम अडानी के खिलाफ जो भी विदेशी प्रॉपगेंडा चलाया गया था, वो अब पूरी तरह से डस्टबिन में डाला जा चुका है। बड़े-बड़े फंड मैनेजर अब अफवाहों पर नहीं, बल्कि भारत के सॉलिड ग्राउंड रियलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर पैसा लगा रहे हैं। कैपिटल ग्रुप जैसी कंपनियों का यह कदम आने वाले समय में अन्य विदेशी निवेशकों के लिए भी भारत और खासकर अडानी ग्रुप के दरवाजे पूरी तरह से खोल देगा। बाजार में यह आक्रामकता, यह तेज रफ्तार निवेश और एक भारतीय बिजनेसमैन का पूरी दुनिया में छा जाना, यह नए भारत की असली ताकत है। यह वो भारत है जो विदेशी दबाव में नहीं झुकता, बल्कि अपनी परफॉरमेंस से उन्हें अपना मुरीद बना लेता है।

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