भारत के कूटनीतिक दबाव में झुका बांग्लादेश, PM तारिक रहमान की दिल्ली दरबार में हाजिरी तय!

भारत के कूटनीतिक दबाव में झुका बांग्लादेश, PM तारिक रहमान की दिल्ली दरबार में हाजिरी तय!

साउथ एशिया की जियोपॉलिटिक्स में अगर किसी एक देश का डंका बजता है, तो वो सिर्फ और सिर्फ भारत है। नई दिल्ली के इशारे के बिना इस पूरे इलाके में एक पत्ता भी नहीं खड़कता। जो भी देश भारत से टकराने या आंख मिलाने की जुर्रत करता है, उसे देर-सबेर हकीकत का अहसास हो ही जाता है। और अब इसी नई दिल्ली के कूटनीतिक दरबार में अपनी हाजिरी लगाने की तैयारी कर रहे हैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान। जी हां, बिलकुल सही सुन रहे हैं आप। तारिक रहमान का पहला भारत दौरा अब लगभग तय हो चुका है। दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे की डिप्लोमेसी इतनी तेज हो चुकी है कि ढाका से लेकर नई दिल्ली तक बड़े-बड़े अधिकारियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। कोशिश यही है कि इसी महीने के आखिर तक या फिर अगले महीने के पहले हफ्ते में तारिक रहमान का प्लेन नई दिल्ली के रनवे पर लैंड कर जाए।

यह दौरा कोई रूटीन विजिट नहीं है। यह दौरा है एक पड़ोसी मुल्क की उस मजबूरी का, जिसे समझ आ गया है कि भारत के बिना उसका सर्वाइवल नामुमकिन है। पिछले कुछ हफ्तों से ढाका और नई दिल्ली के बीच जो टेंशन का माहौल बना हुआ था, अब उसे नॉर्मल करने की जद्दोजहद शुरू हो चुकी है। तारिक रहमान अगर दिल्ली आते हैं, तो उनके एजेंडे में सबसे ऊपर होगा गंगा जल संधि और उन अहम ऊर्जा समझौतों को फिर से ट्रैक पर लाना, जो दोनों देशों के बीच लटके पड़े हैं। इसके अलावा बांग्लादेश की सबसे बड़ी टीस वो व्यापारिक प्रतिबंध हैं जो भारत ने पिछले साल मई में लगाए थे। ढाका की इकॉनमी इस वक्त वेंटिलेटर पर है और उसे ऑक्सीजन सिर्फ नई दिल्ली से ही मिल सकती है। राजनयिक सूत्रों की मानें तो अगले कुछ ही दिनों में बहुत बड़े और पॉजिटिव डेवलपमेंट्स देखने को मिल सकते हैं।

5 अगस्त का वो दिन जब कांप उठा था ढाका

इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। तारीख थी 5 अगस्त। नई दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब में एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस होती है। स्क्रीन पर नजर आती हैं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके बेटे साजीब वाजेद जॉय। इस एक प्रेस कॉन्फ्रेंस ने पूरे ढाका में भूचाल ला दिया। तारिक रहमान की सरकार में इस कदर पैनिक फैल गया कि बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को बाकायदा बयान जारी करना पड़ा। ढाका ने खुलेआम कहा कि वह शेख हसीना की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस से बहुत नाराज है और इसे सीधे तौर पर बांग्लादेश की संप्रभुता यानी सोवरेन्टी का अपमान मान रहा है। सोचिए, नई दिल्ली में बैठकर दिया गया एक बयान ढाका की सत्ता की नींव कैसे हिला देता है। बांग्लादेश को यह डर सताने लगा कि अगर भारत की जमीन से शेख हसीना और अवामी लीग के नेता इसी तरह एक्टिव रहे, तो तारिक रहमान के लिए सत्ता चलाना किसी बुरे सपने से कम नहीं होगा।

जब R&AW ने दिया ढाका में दस्तक

ढाका अभी शेख हसीना के खौफ से उबरा भी नहीं था कि भारत ने अपना सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक चल दिया। 9 अगस्त की तारीख साउथ एशिया के डिप्लोमैटिक इतिहास में दर्ज हो गई। भारत की एक्सटर्नल इंटेलिजेंस एजेंसी, रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी R&AW के सेक्रेटरी पराग जैन के नेतृत्व में एक बेहद हाई-प्रोफाइल प्रतिनिधिमंडल सीधे ढाका पहुंच गया। यह कोई आम दौरा नहीं था। यह नई दिल्ली का वो साइलेंट मैसेज था, जिसे समझने में तारिक रहमान को एक मिनट भी नहीं लगा। खुफिया एजेंसी के चीफ का इस तरह बांग्लादेश जाना और वहां की लीडरशिप से मिलना इस बात का सीधा संकेत था कि भारत अपने नेशनल इंट्रेस्ट को लेकर कोई भी समझौता करने के मूड में नहीं है। नई दिल्ली ने साफ कर दिया कि वो रीजनल सिक्योरिटी और अपने रणनीतिक हितों को सर्वोपरि रखता है।

R&AW चीफ के इस दौरे ने ढाका के तेवर पूरी तरह से ढीले कर दिए। जो बांग्लादेश 5 अगस्त को सोवरेन्टी के नाम पर बयानबाजी कर रहा था, वो 9 अगस्त आते-आते बिल्कुल बैकफुट पर आ गया। भारत की स्मार्ट डिप्लोमेसी देखिए। एक तरफ विदेश मंत्रालय ने खुद को शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस से बड़ी ही सफाई से अलग कर लिया, जिससे ढाका को थोड़ा स्पेस मिले, लेकिन दूसरी तरफ अपने इंटेलिजेंस चीफ को भेजकर यह भी बता दिया कि गेम का कंट्रोल किसके हाथ में है।

उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी और ढाका की नई सुबह

R&AW चीफ के दौरे के ठीक अगले दिन, यानी 10 अगस्त सोमवार को ढाका के सचिवालय में एक बहुत ही क्रूशियल मीटिंग हुई। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी सीधे तारिक रहमान से मिलने पहुंच गए। उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी पिछले कई दिनों से दोनों देशों के रिश्तों में जमी बर्फ को पिघलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे थे। 10 अगस्त की यह मीटिंग उसी का नतीजा थी। इस मीटिंग के बाद ही यह तय हो पाया कि तारिक रहमान को जल्द से जल्द नई दिल्ली का रुख करना होगा।

ढाका के सूत्रों ने यह माना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत बहुत ही पॉजिटिव नोट पर चल रही है। लेकिन बांग्लादेश ने अपनी कुछ शर्तें या यूं कहें कि अपनी चिंताएं भी सामने रखी हैं। ढाका का कहना है कि भारत से अवामी लीग और शेख हसीना की लगातार राजनीतिक गतिविधियां नई दिल्ली और ढाका के बीच शुरू हो रही इस नई पहल पर पानी फेर सकती हैं। तारिक रहमान की सरकार चाहती है कि भारत शेख हसीना के पॉलिटिकल मूवमेंट्स पर लगाम लगाए, ताकि बांग्लादेश के अंदर का माहौल न बिगड़े।

वक्त कम है और दांव बहुत बड़ा

ढाका को एक बात और बहुत अच्छी तरह से समझ आ गई है कि राजनयिक बातचीत का यह जो विंडो खुला है, वो बहुत जल्द बंद भी हो सकता है। साल के बचे हुए चार महीनों में भारतीय लीडरशिप का शेड्यूल इतना ज्यादा पैक्ड है कि उनके पास ढाका की मान-मनौवल के लिए फालतू वक्त नहीं होगा। अगर तारिक रहमान ने अभी दिल्ली का दौरा नहीं किया, तो उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। और यह इंतजार बांग्लादेश की डूबती इकॉनमी अफोर्ड नहीं कर सकती। भारत के व्यापारिक प्रतिबंधों ने पहले ही ढाका की कमर तोड़ रखी है। ऊर्जा संकट से देश जूझ रहा है। ऐसे में नई दिल्ली से पंगा लेना तारिक रहमान के लिए पॉलिटिकल सुसाइड के बराबर होगा।

ब्रिक्स से दूरी की असली वजह

इस पूरी जियोपॉलिटिकल बिसात पर एक और दिलचस्प मोहरा चला गया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने तारिक रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए बाकायदा न्योता भेजा था। लेकिन अब जो खबरें छनकर आ रही हैं, उनके मुताबिक तारिक रहमान शायद ही ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए भारत आएं। इसके पीछे भी एक बहुत गहरी रणनीति है। बांग्लादेश इस वक्त वेस्टर्न कंट्रीज और अपने पड़ोसियों के बीच एक बहुत ही नाजुक बैलेंस बनाने की कोशिश कर रहा है। ब्रिक्स जैसे मंच पर, जहां रूस और चीन जैसी महाशक्तियों का भारी दबदबा है, वहां जाने से तारिक रहमान बचना चाहते हैं ताकि पश्चिमी देशों को कोई गलत संदेश न जाए। लेकिन भारत से वो दूरी नहीं बना सकते, इसीलिए ब्रिक्स से अलग, एक बायलेटरल विजिट के तौर पर वो सीधे नई दिल्ली के साथ टेबल पर बैठना चाहते हैं।

कुल मिलाकर, साउथ एशिया की कूटनीति इस वक्त अपने चरम पर है। भारत ने बिना कोई शोर शराबा किए, अपनी मजबूत विदेश नीति और कड़े फैसलों से बांग्लादेश को एक बार फिर नेगोशिएशन टेबल पर ला खड़ा किया है। तारिक रहमान का यह दौरा सिर्फ एक विजिट नहीं होगा, बल्कि यह इस बात का ऐलान होगा कि इस रीजन में नीतियां वही बनेंगी, जिन पर नई दिल्ली की मुहर होगी। अब देखना यह है कि जब तारिक रहमान दिल्ली की जमीन पर कदम रखते हैं, तो वो अपने देश की जनता के लिए भारत से क्या राहत लेकर जाते हैं, और बदले में नई दिल्ली उनसे क्या-क्या मनवाती है।

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