अगर आप आज अपनी गाड़ी लेकर घर से निकलने वाले हैं और पेट्रोल पंप जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। ग्लोबल मार्केट में मचे भूचाल का सीधा असर अब आपकी और हमारी जेब पर पड़ना शुरू हो गया है। देश भर में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दामों में एक बार फिर से जबरदस्त उछाल आया है। यह कोई मामूली बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि पिछले सिर्फ 10 दिनों के अंदर आम आदमी के ट्रांसपोर्टेशन बजट पर यह तीसरा बड़ा प्रहार है। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी ने जनता की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि जब ईंधन के दाम बढ़ते हैं, तो उसका इम्पैक्ट सिर्फ गाड़ी चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी इकोनॉमी पर इसका दबाव साफ दिखाई देता है। तेल कंपनियों ने शनिवार सुबह एक बार फिर आम आदमी को झटका देते हुए पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। जो लोग यह सोच रहे थे कि सीएनजी की गाड़ियां उन्हें महंगाई से बचा लेंगी, उनके लिए भी बुरी खबर है। सीएनजी की कीमतों में भी एक रुपये का सीधा इजाफा कर दिया गया है। आपको यह समझना होगा कि यह बढ़ोतरी कोई एक दिन का घटनाक्रम नहीं है। पिछले 10 दिनों के अंदर ईंधन के दामों में यह तीसरी बड़ी बढ़ोतरी है। अगर हम इस पूरे पीरियड का गणित लगाएं, तो पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में कुल मिलाकर करीब 4 से 5 रुपये का बड़ा इजाफा हो चुका है। यह आंकड़े बताने के लिए काफी हैं कि ग्लोबल सप्लाई चेन में कितनी बड़ी रुकावट आ चुकी है और उसका असर सीधे तौर पर भारत के आम नागरिक पर पड़ रहा है।
नई कीमतें क्या हैं और 10 दिन का पूरा हिसाब-किताब
सबसे पहले यह जान लीजिए कि अब आपको एक लीटर तेल के लिए अपनी जेब से कितने रुपये ढीले करने होंगे। इस नई बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। वहीं, डीजल अब 92.49 रुपये प्रति लीटर के रेट पर बिक रहा है। बात अगर सीएनजी की करें, तो कल तक जो सीएनजी 80 रुपये 9 पैसे प्रति किलो के हिसाब से मिल रही थी, वह अब छलांग लगाकर 81.09 रुपये के लेवल पर पहुंच गई है। सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत देश के तमाम बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर को छू रही हैं।
अब जरा पिछले 10 दिनों की क्रोनोलॉजी को समझिए कि आखिर यह दाम कैसे और कब-कब बढ़े। इस पूरे एपिसोड की शुरुआत 16 मई से होती है। 16 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक 3 रुपये प्रति लीटर का बड़ा और सीधा इजाफा किया गया था। उसी दिन सीएनजी के दाम भी 2 रुपये प्रति किलो बढ़ा दिए गए थे। आम आदमी अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि अगले ही दिन यानी 17 मई को सीएनजी की कीमतों में 1 रुपये का अतिरिक्त इजाफा कर दिया गया। सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद 19 मई को तेल कंपनियों ने कीमतों में करीब 90 पैसे की एक और बढ़ोतरी कर दी। और अब आज के इस ताजा अपडेट में पेट्रोल 87 पैसे, डीजल 91 पैसे और सीएनजी एक रुपये और महंगी हो गई है। यह लगातार बढ़ता ग्राफ इस बात का सीधा संकेत है कि इंटरनेशनल मार्केट में कुछ बहुत बड़ा चल रहा है जिसका कंट्रोल सीधे तौर पर हमारे हाथ में नहीं है।
आखिर क्यों लग रही है कीमतों में आग? मिडिल ईस्ट और होर्मुज स्ट्रेट का पूरा गणित
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि 10 दिन में ही पेट्रोल-डीजल के दाम रॉकेट की तरह भागने लगे? इसका जवाब भारत की सीमाओं के भीतर नहीं, बल्कि यहां से हजारों किलोमीटर दूर पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में छिपा है। दरअसल, इस वक्त मिडिल ईस्ट में भारी जियोपॉलिटिकल टेंशन चल रही है। दो देशों या गुटों के बीच का यह विवाद अब ग्लोबल इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। इस पूरे संकट के केंद्र में है होर्मुज स्ट्रेट। इसे आसान भाषा में समझें तो यह समंदर का एक बहुत संकरा और बेहद अहम रास्ता है, जहां से दुनिया भर का एक बहुत बड़ा हिस्सा कच्चा तेल लेकर गुजरता है। दुनिया के कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर निकलता है। अब हुआ यह है कि इस विवाद के चलते होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी जैसी स्थिति पैदा हो गई है। जब सप्लाई का इतना बड़ा और अहम रास्ता ब्लॉक हो जाता है या वहां से जहाजों का गुजरना रिस्की हो जाता है, तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की सप्लाई बाधित हो जाती है। डिमांड उतनी ही है, लेकिन सप्लाई कम हो रही है, नतीजा यह है कि कच्चे तेल की कीमतों में ग्लोबल मार्केट में रिकॉर्ड उछाल आ गया है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से इंपोर्ट करता है। ऐसे में जब इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारतीय तेल कंपनियों को भी वह तेल महंगे दाम पर खरीदना पड़ता है। कंपनियां अपना नुकसान नहीं सह सकतीं, इसलिए वह इस बढ़ी हुई लागत का बोझ सीधा आम कंज्यूमर यानी आप पर और हम पर डाल देती हैं। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट की इस टेंशन की कीमत आज भारत का आम नागरिक चुका रहा है।
ट्रांसपोर्टेशन से लेकर किचन तक: महंगाई का यह कैसा चक्रव्यूह
विशेषज्ञों का साफ मानना है कि ईंधन के दाम बढ़ने का असर सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं है जिनके पास अपनी कार या बाइक है। यह एक चेन रिएक्शन की तरह काम करता है। जब डीजल महंगा होता है, तो देश भर में ट्रकों और मालवाहक वाहनों का ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट यानी मालभाड़ा बढ़ जाता है। हमारे देश में फल, सब्जियां, खाद्यान्न, दूध और रोजमर्रा के इस्तेमाल का लगभग हर सामान एक राज्य से दूसरे राज्य तक ट्रकों के जरिए ही पहुंचता है। मालभाड़ा बढ़ने का सीधा मतलब है कि किसान के खेत से लेकर आपके घर तक पहुंचने वाले हर सामान की लागत बढ़ जाएगी। इसका सीधा असर मंडियों में सब्जियों और अनाज के दामों पर पड़ेगा। इसके अलावा जो लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए टैक्सी, ऑटो और कैब का किराया महंगा हो जाएगा। ओवरऑल बात करें तो आने वाले दिनों में आम जनता को महंगाई के एक और बड़े दौर का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो वह अपने साथ हर चीज के दाम ऊपर खींच लेते हैं।
पेट्रोल पंपों पर पैनिक बाइंग और सरकार का सख्त एक्शन
इस पूरी स्थिति के बीच देश के कई हिस्सों से ऐसी खबरें भी आने लगीं कि पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं। व्हाट्सएप और सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ने लगीं कि देश में तेल खत्म होने वाला है और सप्लाई पूरी तरह रुक जाएगी। इस डर के माहौल में लोगों ने अपनी जरूरत से ज्यादा तेल भरवाना शुरू कर दिया, जिसे पैनिक बाइंग कहा जाता है। लेकिन यहां एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें अफवाहों पर नहीं बल्कि फैक्ट्स पर ध्यान देना होगा। केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस पूरे मामले पर बेहद प्रोएक्टिव रुख अपनाते हुए तुरंत स्थिति को संभाला है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने साफ और कड़े शब्दों में देश की जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की घबराहट में आकर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की खरीदारी न करें। सरकार ने बिल्कुल क्लियर कर दिया है कि देश भर में पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता बनी हुई है। भारत के पास अपना एक मजबूत स्ट्रेटेजिक रिजर्व है और तेल कंपनियों की सप्लाई चेन पूरी तरह से स्थिर है। मंत्रालय ने यह भी माना कि अचानक उड़ी अफवाहों और पैनिक बाइंग की वजह से कुछ पेट्रोल पंपों पर अस्थायी तौर पर दबाव जरूर देखा गया है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियां दिन-रात काम कर रही हैं। वे लगातार सप्लाई की निगरानी कर रही हैं और पूरे देश में तेल का समन्वित वितरण सुनिश्चित कर रही हैं ताकि कहीं भी एक बूंद तेल की कमी न होने पाए।
उससे एक दिन पहले भी सरकार ने यह आश्वस्त किया था कि देश के हर पेट्रोल पंप पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकार देशहित में हर संभव प्रयास कर रही है कि ग्लोबल क्राइसिस का असर भारत की डोमेस्टिक सप्लाई चेन पर न पड़े। ऐसे में यह हमारी और आपकी जिम्मेदारी है कि हम पैनिक न करें। मंत्रालय ने बहुत सही बात कही है कि लोग केवल अपनी वास्तविक जरूरत के अनुसार ही ईंधन खरीदें। अगर हम सब एक साथ जरूरत से ज्यादा पेट्रोल भरवाने पहुंच जाएंगे, तो जो सप्लाई चेन सुचारू रूप से चल रही है, उस पर बेवजह का प्रेशर पड़ेगा। एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हमें इस मुश्किल वक्त में समझदारी दिखानी होगी। जिम्मेदार खपत और जनता का पूरा सहयोग ही इस ग्लोबल क्राइसिस के दौर में हर भारतीय तक ईंधन की सुचारू उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद करेगा। ग्लोबल टेंशन अपनी जगह है, लेकिन भारत की इकोनॉमी और सप्लाई चेन इतनी मजबूत है कि वह ऐसे झटकों को बर्दाश्त कर सके। बस जरूरत है तो देशवासियों को बिना किसी पैनिक के, संयम और समझदारी से काम लेने की।





