दलाल स्ट्रीट में कोहराम, लेकिन इस सरकारी बैंक ने मचाया तूफान!
आज जब शेयर बाजार का मूड पूरी तरह से बिगड़ा हुआ था, लाल निशान हर तरफ खौफ पैदा कर रहा था और बड़े बड़े इन्वेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो को गिरता हुआ देखकर टेंशन में थे, ठीक उसी वक्त एक सरकारी बैंक का शेयर सारी ग्रेविटी को मात देते हुए रॉकेट बन गया। हम बात कर रहे हैं आईडीबीआई बैंक की। गिरते बाजार के बीच आईडीबीआई बैंक के शेयर में 5 फीसदी से ज्यादा का सॉलिड जंप देखने को मिला। अब आप सोचेंगे कि जब पूरा मार्केट क्रैश हो रहा है, तो इस अकेले बैंक में ऐसा कौन सा खजाना मिल गया? खजाना मिला नहीं है, बल्कि देश के बैंकिंग सेक्टर में एक बहुत बड़ा इतिहास रचे जाने की तैयारी हो रही है। सालों से जिस मेगा डील का इंतजार दलाल स्ट्रीट कर रहा था, अब वो डील अपने फाइनल स्टेज में पहुंच चुकी है। खबर आ रही है कि सरकार को आखिरकार आईडीबीआई बैंक के लिए वो दमदार खरीदार मिल गया है, जो भारत की इस शानदार ग्रोथ स्टोरी में अपना पैसा लगाने के लिए बेताब है।
फाइनली, सरकार को मिल गया वो खरीददार जिसका था सालों से इंतज़ार!
आपको बता दें कि भारत सरकार पिछले काफी लंबे समय से आईडीबीआई बैंक को प्राइवेटाइज करने की कोशिश कर रही है। ये कोई छोटा मोटा डिसइन्वेस्टमेंट नहीं है, बल्कि ये भारत के फाइनेंस सेक्टर का एक बहुत बड़ा गेम चेंजर साबित होने वाला है। मौजूदा समय में इस बैंक के अंदर भारत सरकार और लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन यानी एलआईसी, दोनों की मिलाकर करीब 95 फीसदी की भारी भरकम हिस्सेदारी है। अगर हम आंकड़ों को बिल्कुल सटीक तरीके से देखें, तो फिलहाल केंद्र सरकार के पास आईडीबीआई बैंक में 45.48 परसेंट का स्टेक है, जबकि एलआईसी के पास 49.24 परसेंट की ओनरशिप है।
सरकार की योजना एकदम क्लियर है। वो इस बैंक से अपनी और एलआईसी की कुल मिलाकर 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचना चाहती है। लेकिन भारत सरकार ने भी साफ कर दिया था कि वो देश की इतनी अहम एसेट को किसी भी औने पौने दाम पर नहीं बेचेगी। मार्च के महीने में कुछ बोलियां आई थीं, लेकिन वो सरकार के मिनिमम रिजर्व प्राइस से काफी नीचे थीं। भारत आज दुनिया की सबसे तेज दौड़ती इकॉनमी है, हमारे बैंकिंग एसेट्स की एक तगड़ी वैल्यू है, और सरकार ने वो बोलियां सीधे तौर पर रिजेक्ट कर दी थीं। मैसेज साफ था, अगर आपको इंडिया के बैंकिंग सेक्टर का हिस्सा बनना है, तो आपको सही कीमत चुकानी होगी। और अब, ऐसा लगता है कि दुनिया के बड़े इन्वेस्टर्स को ये बात समझ आ गई है।
कनाडाई अरबपति और दुबई के बैंक में मची होड़, 5.7 अरब डॉलर का मेगा गेम!
ब्लूमबर्ग और एएनआई की ताजा रिपोर्ट्स ने बाजार में तहलका मचा दिया है। खबर है कि भारत सरकार को आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी खरीदने के लिए कनाडा की दिग्गज कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स लिमिटेड और दुबई के पावरहाउस एमिरेट्स एनबीडी से नई और रिवाइज्ड बोलियां मिली हैं। ये कोई मामूली बोलियां नहीं हैं। सूत्रों के हवाले से जो बात निकलकर सामने आ रही है, वो ये है कि इन कंपनियों ने अपने ऑफर प्राइस को बढ़ा दिया है।
कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल के मालिक भारतीय मूल के अरबपति प्रेम वत्स हैं। प्रेम वत्स को अक्सर कनाडा का वॉरेन बफेट भी कहा जाता है और वो भारत के पोटेंशियल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। पहले उनका ऑफर रिजर्व प्राइस तक नहीं पहुंच पाया था, लेकिन अब उन्होंने प्रति शेयर अपने ऑफर में इजाफा करने का फैसला किया है। अगर हम मौजूदा मार्केट प्राइस के हिसाब से कैलकुलेट करें, तो आईडीबीआई बैंक में इस 60.7 प्रतिशत हिस्सेदारी को खरीदने के लिए फेयरफैक्स को लगभग 5.7 अरब डॉलर का भारी भरकम इन्वेस्टमेंट करना पड़ेगा।
जरा सोचिए, 5.7 बिलियन डॉलर्स! अगर ये डील इस कीमत पर या इससे ज्यादा पर फाइनल होती है, तो ये भारत के बैंकिंग इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी एफडीआई बन जाएगा। फिलहाल दिल्ली में टॉप लेवल पर हलचल तेज है। सोमवार को ही सीनियर अधिकारियों के एक बड़े पैनल ने इन नई बोलियों का इवैल्यूएशन करने के लिए एक अहम बैठक की है। सरकार इस पूरे प्रोसेस को बहुत ही बारीकी और प्रोफेशनल तरीके से हैंडल कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक महीने के अंदर इस मेगा डील की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।
बर्बादी की कगार से रिकॉर्ड मुनाफे तक, आईडीबीआई का पुनर्जन्म!
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर विदेशी कंपनियां और बड़े ग्लोबल बैंक आईडीबीआई बैंक पर इतना पैसा क्यों लुटाना चाहते हैं? इस सवाल का जवाब बैंक के उस शानदार टर्नअराउंड में छिपा है, जो पिछले कुछ सालों में भारत ने देखा है। एक वक्त था जब आईडीबीआई बैंक की हालत बेहद खस्ता थी। पिछली सरकारों की गलत नीतियों और अंधाधुंध लोन बांटने के कल्चर ने इस बैंक को बैड लोन यानी एनपीए के भारी बोझ तले दबा दिया था। बैंक की बैलेंस शीट पूरी तरह से लाल हो चुकी थी और ऐसा लग रहा था कि शायद ये बैंक कभी उबर नहीं पाएगा।
लेकिन फिर शुरू हुआ क्लीनअप का एक बेहद आक्रामक और राष्ट्रवादी दौर। सरकार ने बैंक को तगड़ा कैपिटल सपोर्ट दिया और बैंक के मैनेजमेंट ने डिफाल्टर्स के खिलाफ आक्रामक रिकवरी अभियान चलाया। नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स को बेरहमी से साफ किया गया। जिन लोगों ने बैंक का पैसा दबा रखा था, उनसे एक एक पाई की वसूली की गई। और इसी स्ट्रिक्ट एक्शन का नतीजा है कि जो बैंक कभी हजारों करोड़ के घाटे में था, आज वो शान से मुनाफे के शिखर पर बैठा है।
अगर हम बैंक की परफॉर्मेंस पर नजर डालें, तो आंकड़े किसी भी इन्वेस्टर को हैरान करने के लिए काफी हैं। बैंक का सालाना रेवेन्यू 29 हजार करोड़ से लेकर 34 हजार करोड़ रुपये के शानदार लेवल तक पहुंच चुका है। वहीं अगर हम शुद्ध मुनाफे यानी नेट प्रॉफिट की बात करें, तो सालाना आधार पर इसमें 21 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ देखी गई है और ये प्रॉफिट 7 हजार 500 करोड़ से लेकर 9 हजार 200 करोड़ रुपये के शानदार आंकड़े को पार कर गया है। ये सिर्फ एक बैंक की रिकवरी नहीं है, बल्कि ये भारत के पूरे सिस्टम की ताकत और ट्रांसपेरेंसी का सबूत है। एक डूबा हुआ बैंक आज इतना स्ट्रॉन्ग हो चुका है कि दुनिया के दिग्गज इसे खरीदने के लिए लाइन में लगे हैं।
ग्लोबल इकॉनमी पस्त, लेकिन इंडियन मार्केट में निवेश के लिए दुनिया है मस्त!
आज पूरी दुनिया की इकॉनमी हिचकोले खा रही है। यूरोप मंदी के कगार पर खड़ा है, अमेरिका में महंगाई और स्लोडाउन का डर सता रहा है, और चीन का रियल एस्टेट मार्केट ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा है। दुनिया भर के बड़े इन्वेस्टर्स परेशान हैं कि वो अपना पैसा कहां लगाएं जहां उन्हें सुरक्षा भी मिले और तगड़ा रिटर्न भी। और ऐसे में उन्हें सिर्फ एक ही देश नजर आता है, और वो है हमारा भारत।
भारत आज दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। हमारा सिस्टम मजबूत है, हमारी नीतियां स्पष्ट हैं और हमारा विजन एकदम क्लियर है। विदेशी बैंकों को ये बात बहुत अच्छे से समझ आ गई है कि अगर उन्हें भविष्य में सरवाइव करना है और ग्रोथ चाहिए, तो उन्हें भारत के फाइनेंशियल मार्केट में अपनी जगह बनानी ही होगी। जापानी बैंकों ने तो पिछले साल ही भारतीय बैंकों में हिस्सेदारी खरीदने के लिए 6 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश कर दिया था। और अब कनाडा और दुबई के इन्वेस्टर्स आईडीबीआई के जरिए भारत की इस शानदार इकॉनमी में एंट्री का पास चाहते हैं।
आगे क्या होगा? डील का फाइनल चैप्टर!
फिलहाल, गेंद भारत सरकार के पाले में है। फेयरफैक्स और एमिरेट्स एनबीडी, दोनों की बोलियों का बहुत ही कड़ाई से मूल्यांकन किया जा रहा है। सरकार इस बात को सुनिश्चित करेगी कि देश को और टैक्सपेयर्स को इस डील से मैक्सिमम वैल्यू मिले। सूत्रों की मानें तो बातचीत अभी पूरी तरह से प्राइवेट और कॉन्फिडेंशियल रखी गई है।
एक बार जब इवैल्यूएशन कमिटी किसी एक बिडर को फाइनल कर लेगी, उसके बाद इस डील को आगे बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई और उसके बाद भारत सरकार की कैबिनेट से अंतिम मंजूरी लेनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में अभी कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। लेकिन शेयर बाजार को ये सिग्नल मिल चुका है कि सरकार अब एक्शन मोड में है। इस साल आईडीबीआई के शेयरों में जो 15 प्रतिशत की गिरावट आई थी, वो अब एक शानदार रिकवरी में बदलती हुई नजर आ रही है।
ये डील सिर्फ एक बैंक के बिकने की कहानी नहीं है। ये इस बात का प्रतीक है कि भारत का बैंकिंग सेक्टर आज दुनिया भर के लिए कितना अट्रैक्टिव हो चुका है। हम अब किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते, बल्कि दुनिया के बड़े बड़े इन्वेस्टर्स आज हमारे दरवाजे पर लाइन लगाकर खड़े हैं। आईडीबीआई बैंक का ये प्राइवेटाइजेशन भारतीय इकॉनमी के एक नए और स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है। बाजार की नजरें अब सीधे दिल्ली और आरबीआई पर टिकी हैं कि कब इस 5.7 अरब डॉलर की मेगा डील पर फाइनल मुहर लगती है।





