मोस्ट वॉन्टेड: FBI के टॉप-10 रडार पर गोल्डी बराड़, अमेरिका ने रखा 1 मिलियन डॉलर का बंपर इनाम!

मोस्ट वॉन्टेड: FBI के टॉप-10 रडार पर गोल्डी बराड़, अमेरिका ने रखा 1 मिलियन डॉलर का बंपर इनाम!

दुनिया की सबसे ताकतवर खुफिया एजेंसी एफबीआई जब किसी के पीछे हाथ धोकर पड़ जाए, तो समझ लीजिए कि उस इंसान के बचने के सारे रास्ते हमेशा के लिए बंद हो चुके हैं। दुनिया के नक्शे पर एक बहुत बड़ा ग्लोबल एक्शन शुरू हो चुका है और इस बार निशाने पर है वो नाम, जिसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की रातों की नींद उड़ा रखी थी। हम बात कर रहे हैं गोल्डी बराड़ की। पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब से निकलकर कनाडा भागने वाला यह अपराधी अब कोई मामूली गुंडा या सड़क छाप गैंगस्टर नहीं रह गया है, बल्कि वो इंटरनेशनल अंडरवर्ल्ड का एक ऐसा खतरनाक मोहरा बन चुका है, जिसके सिर पर अब अमेरिका ने 1 मिलियन डॉलर का भारी-भरकम इनाम रख दिया है।

लॉस एंजिल्स फील्ड ऑफिस से एफबीआई ने मंगलवार सुबह एक ऐसा ऐलान किया है, जिसने पूरे नॉर्थ अमेरिका और एशिया के क्राइम सिंडिकेट्स में हड़कंप मचा दिया है। एफबीआई ने गोल्डी बराड़ को अपनी उस ‘टॉप 10 वॉन्टेड भगोड़ों’ की ऐतिहासिक लिस्ट में डाल दिया है, जिसमें कभी ओसामा बिन लादेन और दुनिया के सबसे खूंखार ड्रग लॉर्ड्स के नाम हुआ करते थे। आपको बता दें कि एफबीआई के इतिहास में गोल्डी बराड़ इस कुख्यात लिस्ट में शामिल होने वाला 543वां क्रिमिनल बन गया है। इस लिस्ट में एंट्री का सीधा सा मतलब है कि अब अमेरिका की तमाम संघीय एजेंसियां, सैटेलाइट्स और खुफिया मुखबिर सिर्फ एक ही टारगेट पर फोकस कर रहे हैं, और वो टारगेट है सतिंदरजीत सिंह ऊर्फ गोल्डी बराड़।

RICO एक्ट और अमेरिका में गोल्डी का क्रिमिनल साम्राज्य

आखिर एक भारतीय भगोड़े ने अमेरिका में ऐसा क्या कर दिया कि एफबीआई को अपनी पूरी ताकत उसके पीछे लगानी पड़ी? इसका जवाब है गोल्डी बराड़ का वो खौफनाक नेटवर्क, जिसने अमेरिकी धरती पर सीधे वहां के कार्टेल्स को चुनौती दे डाली। अमेरिकी संघीय अभियोजकों के मुताबिक, गोल्डी बराड़ पर RICO यानी रैकेटियर इन्फ्लुएंस्ड एंड करप्ट ऑर्गेनाइजेशन्स एक्ट के तहत कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं। यह अमेरिका का वो कानून है जो सीधे तौर पर माफिया और संगठित अपराध के बड़े आकाओं को मिट्टी में मिलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

गोल्डी बराड़ सिर्फ भारत में वारदातों को अंजाम नहीं दे रहा था, बल्कि वह अमेरिका के अंदर जबरन वसूली, किडनैपिंग और भारी मात्रा में नशीले पदार्थों की तस्करी का एक पूरा नेक्सस चला रहा था। एफबीआई की डॉकेट फाइल इस बात की गवाही दे रही है कि कैसे इस सिंडिकेट ने लॉस एंजिल्स इलाके में एक प्रतिद्वंद्वी कार्टेल से 500 किलोग्राम कोकीन चुराने जैसी दुस्साहसिक घटना को अंजाम दिया। यह कोई छोटा-मोटा अपराध नहीं था, यह सीधे तौर पर मेक्सिकन और अमेरिकन ड्रग माफियाओं के वर्चस्व को चुनौती देने वाला कदम था। इसी घटना ने एफबीआई को यह समझने पर मजबूर कर दिया कि यह गिरोह अब उनके अपने देश के लिए एक बड़ा नासूर बन चुका है।

लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट का इंटरनेशनल रिमोट कंट्रोल

इस पूरी कहानी का सबसे हैरान करने वाला पहलू वो शख्स है जो भारत की एक हाई-सिक्योरिटी जेल की सलाखों के पीछे बैठा है। लॉरेंस बिश्नोई। एफबीआई और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों का मानना है कि भारत की जेल में बंद बिश्नोई एक मास्टरमाइंड की तरह काम कर रहा है। वह जेल के अंदर से प्रतिबंधित संचार साधनों के जरिए अपने इस अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन का पूरा कंट्रोल गोल्डी बराड़ जैसे अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों के हाथों में सौंपता है।

उत्तरी अमेरिका में इस बिश्नोई-बराड़ सिंडिकेट ने आतंक का जो खौफनाक कॉकटेल तैयार किया है, उसमें टारगेटेड हत्याएं, हथियारों के दम पर करोड़ों की रंगदारी और इंटरनेशनल ड्रग ट्रैफिकिंग शामिल है। यह गिरोह अब केवल एक राज्य या देश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बहुराष्ट्रीय कॉर्पोरेट स्टाइल का क्राइम सिंडिकेट बन चुका है। भारत सरकार सालों से दुनिया को यह चेतावनी दे रही थी कि पश्चिमी देश अपनी धरती पर भारत-विरोधी क्रिमिनल्स को पनाह देना बंद करें। लेकिन कनाडा और अमेरिका की सरकारों ने इसे तब तक हल्के में लिया, जब तक कि इस गैंग ने खुद उनकी जमीनों पर खून-खराबा और ड्रग्स का कारोबार नहीं शुरू कर दिया। अब जब आग उनके अपने घर तक पहुंच चुकी है, तब एफबीआई जैसी एजेंसियों की नींद टूटी है।

निज्जर हत्याकांड और टेरर टैग का असल सच

इस इंटरनेशनल सिंडिकेट का सबसे हाई-प्रोफाइल और भूचाल लाने वाला मामला जून 2023 का है। कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सरे में एक सिख मंदिर के बाहर हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी गई थी। इस मामले ने भारत और कनाडा के कूटनीतिक रिश्तों में एक बहुत बड़ा तूफान ला दिया था। लेकिन अब अमेरिकी संघीय अदालत के दस्तावेजों ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया है। इन दस्तावेजों में साफ तौर पर बिश्नोई और गोल्डी बराड़ पर इस टारगेटेड हत्या का आदेश देने का आरोप है।

इस घटना के बाद पश्चिमी देशों को यह समझ में आ गया कि यह गैंग सिर्फ पैसों के लिए काम नहीं करता, बल्कि इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं। यही वजह है कि सितंबर 2025 में कनाडाई अधिकारियों को मजबूर होकर बिश्नोई सिंडिकेट को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना पड़ा था। गोल्डी बराड़ वो कड़ी है जो भारत के मोस्ट वॉन्टेड क्रिमिनल्स और विदेशी धरती पर बैठे चरमपंथियों के बीच एक पुल का काम कर रहा था।

स्टूडेंट वीजा से लेकर मोस्ट वॉन्टेड तक का सफर

गोल्डी बराड़ का सफर साल 2017 में शुरू हुआ था, जब वह एक साधारण स्टूडेंट वीजा पर भारत से कनाडा गया था। कनाडा का वो लचर इमिग्रेशन सिस्टम, जो अक्सर अपराधियों के लिए एक सेफ हेवन साबित होता रहा है, उसने गोल्डी को वहां अपनी जड़ें जमाने का पूरा मौका दिया। भारत में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर उसने वहां से भारत में कई खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया, जिसमें पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मामला सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा। भारत की पुलिस, इंटरपोल और तमाम खुफिया एजेंसियां लगातार कनाडा सरकार से उसे डिपोर्ट करने की मांग कर रही थीं, लेकिन तब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

अब पश्चिमी देशों को समझ आ चुका है कि अगर इस सिंडिकेट को नहीं रोका गया, तो यह उनके अपने शहरों को गैंगवार की आग में झोंक देगा। इसी खतरे को देखते हुए अमेरिका, कनाडा और यूरोप की पुलिस ने मिलकर एक बहुत बड़ा ग्लोबल मिशन लॉन्च किया है, जिसका नाम है ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’। यह ऑपरेशन सीधे तौर पर भारत से जुड़े उन तीन अंतरराष्ट्रीय अपराध गिरोहों को खत्म करने के लिए चलाया गया है, जिन्होंने पूरी दुनिया में अपनी जड़ें फैला ली हैं। इस ऑपरेशन के दौरान ही गोल्डी बराड़ का नाम सबसे बड़े टारगेट के तौर पर सामने आया।

आज की तारीख में गोल्डी बराड़ का नाम एफबीआई की उस लिस्ट में चमक रहा है, जो किसी भी भगोड़े के लिए मौत का वारंट होती है। 1 मिलियन डॉलर का इनाम कोई छोटी रकम नहीं है। इस इनाम का सीधा मतलब है कि अब गोल्डी बराड़ के अपने ही करीबी, उसके अपने ही मुखबिर चंद पैसों के लिए उसके सिर का सौदा कर सकते हैं। अंडरवर्ल्ड में वफादारी की उम्र बहुत छोटी होती है और जब सामने करोड़ों का इनाम हो, तो बड़े-बड़े सिंडिकेट ताश के पत्तों की तरह बिखर जाते हैं।

भारत की कूटनीतिक और सामरिक नीतियों की यह एक बहुत बड़ी जीत है। भारत ने दुनिया के मंच पर हमेशा कहा है कि आतंकवाद और संगठित अपराध की कोई सीमा नहीं होती। आज अमेरिका और कनाडा का एक्शन भारत के उसी स्टैंड पर मोहर लगा रहा है। एफबीआई के इस कदम ने साफ कर दिया है कि गोल्डी बराड़ अब चाहे दुनिया के किसी भी बिल में छिप जाए, उस तक कानून के हाथ बहुत जल्द पहुंचने वाले हैं। एक स्टूडेंट वीजा से शुरू हुआ यह क्रिमिनल सफर अब एफबीआई की मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में जाकर अपने आखिरी और सबसे खौफनाक अंजाम की तरफ बढ़ चुका है।

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