पिनाका की बढ़ती रेंज और सातवीं रेजिमेंट: सीमा पर भारत की तैयारी

पिनाका की बढ़ती रेंज और सातवीं रेजिमेंट: सीमा पर भारत की तैयारी

पिनाका की असली कहानी

LAC पर सैन्य तैयारी की चर्चा हो, तो पिनाका का नाम तेजी से सामने आता है। वजह केवल इसकी रेंज नहीं, बल्कि यह है कि भारत ने एक स्वदेशी रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम को लगातार बेहतर किया है। लेकिन इस विषय पर कई सनसनीखेज दावे भी चल रहे हैं—जैसे मार्च 2026 में गुप्त ऑपरेशन, चीनी उपग्रहों को चकमा देना और 300 किलोमीटर दूर तक पहुंचने वाला तैयार पिनाका रॉकेट। इन बातों की सार्वजनिक और विश्वसनीय पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए जरूरी है कि वास्तविक क्षमता और अटकलों को अलग-अलग समझा जाए।

पिनाका कोई अचानक सामने आया नया सिस्टम नहीं है। यह भारतीय सेना के लिए DRDO द्वारा विकसित मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर है। इसका नाम भगवान शिव के धनुष से लिया गया है। 8×8 वाहन पर लगा लॉन्चर एक साथ कई रॉकेट दाग सकता है और कम समय में अपनी फायरिंग पूरी करके स्थान बदल सकता है। इसकी ताकत एक अकेले रॉकेट में नहीं, बल्कि फायर कंट्रोल, संचार, मौसम संबंधी जानकारी, पुनःलोडिंग और लॉन्चर दलों के समन्वय में है।

रेंज के आंकड़े क्या बताते हैं?

पिनाका के हर संस्करण की रेंज एक जैसी नहीं है। रक्षा उत्पादन विभाग के उत्पाद विवरण में Pinaka Mk-I Enhanced की रेंज लगभग 46 किलोमीटर और Guided Pinaka की रेंज 75 किलोमीटर दी गई है। DRDO का कहना है कि गाइडेड संस्करण के परीक्षणों में रेंज, सटीकता, निरंतरता और एक साथ कई लक्ष्यों के लिए फायरिंग जैसे मापदंड जांचे गए। इस परीक्षण प्रक्रिया में लद्दाख में उच्च-ऊंचाई वाला चरण भी शामिल था। इसका अर्थ है कि सिस्टम के कुछ संस्करणों को ऊंचे इलाकों में परखा गया; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि कोई खास रेजिमेंट किसी विशेष LAC सेक्टर में तैनात है।

नई प्रगति Pinaka Long Range Guided Rocket, यानी LRGR, से जुड़ी है। DRDO ने 29 दिसंबर 2025 को इसके 120 किलोमीटर अधिकतम रेंज वाले परीक्षण की घोषणा की। इसके बाद 8 जुलाई 2026 को 60 किलोमीटर की न्यूनतम निर्धारित दूरी पर भी इसका परीक्षण हुआ। दोनों परीक्षणों में यह रॉकेट मौजूदा पिनाका लॉन्चर से छोड़ा गया। इससे एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग रेंज वाले संस्करण चलाने की उपयोगिता सामने आती है। लेकिन परीक्षण सफल होना और पूरे सिस्टम को सेना में नियमित रूप से शामिल करना अलग-अलग चरण हैं।

दिसंबर 2025 में रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने पिनाका के लिए Long Range Guided Rocket Ammunition की खरीद को Acceptance of Necessity दी थी। यह खरीद प्रक्रिया का एक कदम है, अंतिम आपूर्ति या पूरी तरह परिचालन में आने का प्रमाण नहीं। इसी तरह, 300 किलोमीटर रेंज वाले संस्करण पर पहले विकास की चर्चा हुई है, मगर उपलब्ध आधिकारिक सूचना 120 किलोमीटर LRGR परीक्षण की पुष्टि करती है। 370 मिलीमीटर के तैयार रॉकेट, Mach 5 गति और 300 किलोमीटर तक सक्रिय तैनाती जैसे दावों को स्थापित तथ्य की तरह पेश करने का आधार नहीं दिखता।

44 सेकंड और फायरिंग क्षमता

पिनाका की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसकी तेज salvo firing क्षमता है। रक्षा उत्पादन विभाग के अनुसार, एक लॉन्चर 12 रॉकेट लगभग 44 सेकंड में दाग सकता है। एक बैटरी में छह लॉन्चर वाहन होते हैं। इस आधार पर बैटरी में कुल 72 रॉकेट ले जाने की क्षमता बताई जाती है। हालांकि, एक लॉन्चर के 44 सेकंड वाले आंकड़े को इस तरह नहीं समझना चाहिए कि हर परिस्थिति में पूरी बैटरी के सभी 72 रॉकेट बिल्कुल उसी समय में दागे जाएंगे। वास्तविक फायरिंग का क्रम मिशन, लक्ष्य क्षेत्र, कमांड व्यवस्था और परिचालन स्थितियों पर निर्भर करता है।

इस तरह की प्रणाली का उद्देश्य निर्धारित क्षेत्र में कम समय के भीतर बड़ी संख्या में रॉकेट पहुंचाना है। गाइडेड संस्करण का विकास इस क्षमता को अधिक नियंत्रित और सटीक बनाने की दिशा में है। नवंबर 2024 में DRDO ने गाइडेड पिनाका के परीक्षणों की सफलता और विभिन्न उत्पादन एजेंसियों से जुड़े रॉकेटों के आकलन की जानकारी दी थी। इसके डिजाइन और उत्पादन में ARDE, HEMRL, RCI और DRDL जैसे DRDO संस्थानों के साथ सार्वजनिक और निजी उद्योगों की भागीदारी है।

ऊंचे पहाड़ों पर इस्तेमाल की चुनौती

लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में किसी भी आर्टिलरी सिस्टम को केवल उसकी घोषित रेंज से नहीं आंका जा सकता। वहां सड़क और रसद की उपलब्धता, तापमान, हवा, ऊंचाई, संचार और उपकरणों का रखरखाव अहम होते हैं। DRDO द्वारा लद्दाख में गाइडेड पिनाका के उच्च-ऊंचाई परीक्षण किए जाने की पुष्टि एक महत्वपूर्ण तथ्य है। मगर इसके आधार पर यह कहना ठीक नहीं होगा कि पतली हवा से रेंज अपने आप 105 या 110 किलोमीटर हो जाती है। ऐसा कोई सार्वजानिक आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

पहाड़ी भूभाग में तैनाती की योजना भी गोपनीय सैन्य जानकारी का हिस्सा हो सकती है। इसीलिए किसी विशेष सड़क, सुरंग, अग्रिम मोर्चे या बैटरी की लोकेशन के बारे में अपुष्ट विवरण को रिपोर्टिंग में शामिल करना उचित नहीं है। जनता के सामने उपलब्ध जानकारी से इतना जरूर कहा जा सकता है कि भारत ने पिनाका को ऊंचाई वाले इलाके में परखा है और उसकी लंबी दूरी की क्षमता पर काम जारी है। उससे आगे के दावों को पुष्टि की जरूरत है।

रेजिमेंट और तैनाती पर उपलब्ध जानकारी

मार्च 2026 की मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय सेना ने पिनाका की सातवीं रेजिमेंट को परिचालन में शामिल किया था और आठवीं रेजिमेंट की तैयारी की खबर भी आई थी। इन रिपोर्टों में सीमाओं पर तैनाती का उल्लेख है, लेकिन विशेष यूनिट की सटीक जगह या LAC के किसी खास हिस्से की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। इसलिए यह कहना कि पिनाका की सातवीं रेजिमेंट को किसी निश्चित रात गुप्त रूप से लद्दाख और तवांग पहुंचाया गया, उपलब्ध सार्वजनिक प्रमाणों से समर्थित नहीं है।

उपग्रहों को पूरी तरह अंधा कर देने, रेडियो साइलेंस में ऑपरेशन वज्र दृष्टि चलाने और चीन की 76वीं या 77वीं ग्रुप आर्मी की गतिविधियों को हफ्तों पहले पकड़ लेने जैसे दावों की भी सार्वजनिक पुष्टि नहीं मिली। ऐसे दावों को तथ्य की तरह दोहराने से दर्शक को एक काल्पनिक सैन्य घटनाक्रम असली खबर जैसा लग सकता है। गंभीर रक्षा रिपोर्टिंग में पुष्टि, आधिकारिक बयान और विश्लेषण—इन तीनों को स्पष्ट रूप से अलग रखना जरूरी है।

स्वदेशी क्षमता का महत्व

पिनाका का रणनीतिक महत्व इस बात में भी है कि यह भारत में विकसित और निर्मित सिस्टम है। 2024 के गाइडेड रॉकेट परीक्षणों में उत्पादन एजेंसियों के रूप में Munitions India Limited और Economic Explosives Limited का उल्लेख हुआ, जबकि लॉन्चर और बैटरी कमांड पोस्ट के निर्माण में Tata Advanced Systems और Larsen & Toubro शामिल रहे। यह साझेदारी बताती है कि आधुनिक रक्षा उत्पादन में सरकारी प्रयोगशालाओं के साथ भारतीय उद्योग भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।

इससे सेना को भविष्य में अलग-अलग रेंज और गाइडेंस वाले रॉकेटों के विकल्प मिल सकते हैं। स्वदेशी उत्पादन से आपूर्ति, रखरखाव और आगे के सुधारों पर देश के भीतर काम करना आसान हो सकता है। लेकिन किसी भी नई प्रणाली को परिचालन में लाने के लिए परीक्षण, गुणवत्ता जांच, उत्पादन क्षमता, प्रशिक्षण और सैन्य जरूरतों का मिलान करना पड़ता है। इसलिए हर सफल परीक्षण को तत्काल तैनाती या युद्धक तैयारी के बराबर नहीं मानना चाहिए।

पिनाका की कहानी का सबसे ठोस निष्कर्ष यही है: भारत ने पहले से सेवा में मौजूद एक स्वदेशी रॉकेट सिस्टम को गाइडेड संस्करणों और 120 किलोमीटर श्रेणी के LRGR तक आगे बढ़ाया है। लद्दाख में उच्च-ऊंचाई परीक्षण हुए हैं, और 2026 में सातवीं रेजिमेंट के परिचालन में आने की मीडिया रिपोर्टें भी हैं। इसके साथ ही 300 किलोमीटर रेंज, विशेष गुप्त ऑपरेशन, उपग्रहों को चकमा देने और LAC पर किसी निश्चित तैनाती के दावे अभी सार्वजनिक रूप से प्रमाणित नहीं हैं।

सीमा सुरक्षा का भरोसेमंद आकलन बड़े-बड़े दावों से नहीं, बल्कि जांचे जा सकने वाले तथ्यों से बनता है। पिनाका भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता में एक अहम कदम है—और इसकी वास्तविक प्रगति को सही आंकड़ों, परीक्षणों और आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर समझना ही सबसे मजबूत रिपोर्टिंग होगी।

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